अचानक
एक तेज़ रफ्तार
गाड़ी ...
कुचल गई
राहगीर को .......
भीड़
इकट्ठा हुई और
गिने जाने लगे दोष ...
और होने लगी
तहकीकात
दोषी की .....
भीड़ में ही
मौजूद था कोई
कवि ....
लिख डाली तुरंत
एक मार्मिक कविता
...............
अगले दिन
दोनों सुर्ख़ियों में थे ....
एक मार्मिक भाव की
नई रचना के लिए ....
और दूसरा
'सडक हादसे ने
ले ली एक और जान ......!!!!
और यूँ ....
रचनायें जन्मती हैं
मरती
है .......
जड़ और चेतन की परवाह
कौन करे ......???
एक तेज़ रफ्तार
गाड़ी ...
कुचल गई
राहगीर को .......
भीड़
इकट्ठा हुई और
गिने जाने लगे दोष ...
और होने लगी
तहकीकात
दोषी की .....
भीड़ में ही
मौजूद था कोई
कवि ....
लिख डाली तुरंत
एक मार्मिक कविता
...............
अगले दिन
दोनों सुर्ख़ियों में थे ....
एक मार्मिक भाव की
नई रचना के लिए ....
और दूसरा
'सडक हादसे ने
ले ली एक और जान ......!!!!
और यूँ ....
रचनायें जन्मती हैं
मरती
है .......
जड़ और चेतन की परवाह
कौन करे ......???

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