बुधवार, 8 जून 2011

अंतर

अंतर है 
मंदिर के पत्थर 
और 
रास्ते के पत्थर 
 में 
इतना ही 
एक पर 
विश्वास किया 
तुमने ...
और 
दूसरे ने 
तुम पर .......

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर ..


    अंतर है
    मंदिर के पत्थर
    और
    रास्ते के पत्थर
    में
    इतना ही
    एक को
    गढ़ कर
    बना दिया
    भगवान
    और दुसरे को
    मार दी
    ठोकर ..

    एक नजरिया यह भी ..

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  2. हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

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  3. welcome & heartly thanks...Rashmi ji,also Digamber naasva ji.

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  4. एक को
    गढ़ कर
    बना दिया
    भगवान .....
    बस यही नज़रिया ही तो फ़लसफ़ा है जिंदगी का ...
    बहुत बहुत धन्यवाद संगीता जी

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  5. संजय भास्कर जी आप का ब्लॉग पे स्वागत ,धन्यवाद.. अभिव्यक्ति के प्रोत्साहन और शब्दों को सुनने के लिए ...
    मै लिखती कहाँ हूँ... ,फिर भी लेखनी के उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया

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  6. एक पर
    विश्वास किया
    तुमने ...
    और
    दूसरे ने
    तुम पर .......


    बहुत खूब...कम शब्दों में गहरी बात.

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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