सोमवार, 12 सितंबर 2011
बुधवार, 31 अगस्त 2011
समं दर का सूरज
अमृता के जन्म दिन पर अमृता के लिए
समं दर का सूरज
तीन बार
किनारों ने
सिर उठाया
तीनों बार
उनके वजूद को
चूर होते पाया ...
इसलिए
छोड़
किनारों को पीछे
नदी के बहाव को
लगाया गले ....
पर
जानती हो ...
किनारे
छूटते कहाँ है..!
चलते हैं वो तो
साथ ही
या
घुल जाते है
लहरों के आवेग से .....
समंदर हो
और तुम्हारे
माथे पर
चमकता सूरज
कोई और नहीं
तुम्हारे
घुले हुए किनारे है........
शनिवार, 27 अगस्त 2011
गुरुवार, 18 अगस्त 2011
रविवार, 7 अगस्त 2011
सोमवार, 25 जुलाई 2011
भाव
भाव बिन
सूनी भक्ति.....
प्रेम बिन
सूना जीवन .....
बिन मन
निभे न रिश्ते...... ,
दिखते जैसे
लिबास और तन.....
सोमवार, 11 जुलाई 2011
गुरुवार, 7 जुलाई 2011
(.......क्यूँ ...........)
विरासत भी
....तू.....
वारिस भी
.....तू.......
फिर
वसीयत में
उलझनें
इतनी ,
बता ....
क्यूँ ..?????
लिखता है
तू......!!!!!!!
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