मंगलवार, 17 अप्रैल 2012
शनिवार, 7 अप्रैल 2012
जिंदगी......
उसने कहा.........
जिंदगी क्या है
एक खूबसूरत गीत
या कोई हसीन ख्वाब ..... ।
मैंने कहा
गीत या ख्वाब
तो नहीं पता, पर हॉ
जीने के लिये
जरूरी है
‘कुत्ते सी वफादारी’
क्योंकि, जरा सी ‘चूक’
बना देगी ‘लावारिस’
इतना ही नहीं
घोषित कर दिऐ जाओगे
‘हलकाए’ हुए
और मार दिए जाओगे
‘बेमौत’
मीठी रोटी में
मिलाकर जहर
तब, जिंदगी के मायने
चढ़ जाएगे बलि
‘म्यूनसपैलिटी’ वालों के
‘जनसुरक्षा’
अभियान के तहत.....!!
( "काव्यांजलि " में प्रकाशित )
( "काव्यांजलि " में प्रकाशित )
मंगलवार, 20 मार्च 2012
ख्याल .....................
रूह में उतरा है सूरज इन दिनों ...
बिखरे पत्तों को समेटती है जब हवा ...
खनकती है कोई आवाज़ इन दिनों .....
बचा कर आसमां से नजर ,खिड़की से
उतरता है चाँद ,मेरे घर इन दिनों......
न दरिया , न पत्थर ,न ही पानी ..
फिर भी आँखों में है भंवर इन दिनों ....
ख्याल उसके की पाकीज़गी तो देखिये ....
खुदा में भी आता है ,वो नजर इन दिनों ......
मिला जब वो ,खुदी में मिल गया .....
तलाश में जिसकी गुमशुदा थे इन दिनों .....
सोमवार, 12 मार्च 2012
प्रेरणा .............
हॉ, सुधि् में बसी
वो मौन अनुभूति
जो ले जाती है
तेज हवा के झोंके सी
नदी के बहाव को
समन्दर की ओर ...........
जहाँ, चाहने पर भी बहुत
नहीं जा पाते,
हम अकसर...!
हाँ, यही है
वो अहसास, जो
बन जाता है कारण
स्वयं हमें, ‘हम’ से
मिलाने का....
वर्ना ,
कहाँ पहुँच पाते हैं
हम, स्वयं के
अहसास तक ..................!!!!!
सोमवार, 5 मार्च 2012
माँतृ प्रेम पूजनीय है तो..... पितृ प्रेम ......अतुलनीय ...!
पिता कठोर हो सकता है पर पत्थर नही ......
पत्थर लगे तो सोचना ......
पत्थरों से भी पानी रिसता है .....
समंदर की लहरों का असर उस पर भी होता है ...........
.
धार पर छैनी की ..लेकर के अभाव .....
भरता है झोली ....देकर के भाव ......
नही झलकता , बस बरसता ,
मन मंदिर के द्वार ..
लिए नयन में अश्रु धार
बहता भीतर ही भीतर
खामोश समंदर सा दुलार ......!!
(आज पितृ दिवस तो नही .....पर हाँ ...
एक पिता की मौन भावना दिल को छू गई ...
और सभी पिताओं को आईना दे गई ......)
पिता कठोर हो सकता है पर पत्थर नही ......
पत्थर लगे तो सोचना ......
पत्थरों से भी पानी रिसता है .....
समंदर की लहरों का असर उस पर भी होता है ...........
.
धार पर छैनी की ..लेकर के अभाव .....
भरता है झोली ....देकर के भाव ......
नही झलकता , बस बरसता ,
मन मंदिर के द्वार ..
लिए नयन में अश्रु धार
बहता भीतर ही भीतर
खामोश समंदर सा दुलार ......!!
(आज पितृ दिवस तो नही .....पर हाँ ...
एक पिता की मौन भावना दिल को छू गई ...
और सभी पिताओं को आईना दे गई ......)
गुरुवार, 1 मार्च 2012
सोमवार, 20 फ़रवरी 2012
दृष्टिकोण .....
शिवरात्रि के रोज़
पत्तों और
कच्चे फलों से
विरक्त कर दिया गया
'बेल 'का पेड़ .....!
श्रद्धा ,अभिव्यक्ति का
ये रूप
मुझे गया
झकझोर ....
क्यूंकि ,
एक स्पर्श के बाद
पत्तों ,फलों की
जगह थी
कचरे का डिब्बा ...!!
सोच रही हूँ .....
समय से पहले
ये मृत्यु है
जीवन की ,
या फिर
मुक्ति का
कोई सिलसिला ....!
धारणाओं ,मान्यताओं
की भूमि पर ,
जीवंत हो गया
दृष्टिकोण ....
अन्त:करण पुकार उठा ....
जीवन जीवन होता है .....
भिन्न होता है तो
दृष्टिकोण .....
जो देता है मायने
जीवन को ........!!
(ये दृश्य मनगढंत नहीं ...हकीकत है ...)
("काव्य चेतना " से ..)
संपादक :डॉ. धर्म स्वरुप गुप्त
वर्ष :2009
पत्तों और
कच्चे फलों से
विरक्त कर दिया गया
'बेल 'का पेड़ .....!
श्रद्धा ,अभिव्यक्ति का
ये रूप
मुझे गया
झकझोर ....
क्यूंकि ,
एक स्पर्श के बाद
पत्तों ,फलों की
जगह थी
कचरे का डिब्बा ...!!
सोच रही हूँ .....
समय से पहले
ये मृत्यु है
जीवन की ,
या फिर
मुक्ति का
कोई सिलसिला ....!
धारणाओं ,मान्यताओं
की भूमि पर ,जीवंत हो गया
दृष्टिकोण ....
अन्त:करण पुकार उठा ....
जीवन जीवन होता है .....
भिन्न होता है तो
दृष्टिकोण .....
जो देता है मायने
जीवन को ........!!
(ये दृश्य मनगढंत नहीं ...हकीकत है ...)
("काव्य चेतना " से ..)
संपादक :डॉ. धर्म स्वरुप गुप्त
वर्ष :2009
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012
बुधवार, 1 फ़रवरी 2012
इंतज़ार .......
इंतज़ार.....
नहीं सिला
जा सकता ....
यकीनन ,
सिला जा सकता ,
तो .....
बन जाता लिबास ....
जिसे जब चाहा...
फैंक दिया जाता ...
उतार कर.....या
दे दिया जाता...
किसी को दान में .....
या बेच दिया जाता ...
बाज़ार में ...
किसी नई
ख्वाहिश की खातिर .....!
शायद ..
इसी लिए
पहनता है इसे
कोई फरियादी ,
लपेट कर खुद को
सहेजता है जैसे....
स्वयं को ,
स्वयं में से ....!!!
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