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सोमवार, 12 मार्च 2012

प्रेरणा .............

प्रेरणा .............
हॉसुधि् में बसी
वो मौन अनुभूति
जो ले जाती है
तेज हवा के झोंके सी
नदी के बहाव को
समन्दर की ओर ...........
जहाँचाहने पर भी बहुत
नहीं जा पाते,
हम अकसर...!
हाँयही है
वो अहसासजो
बन जाता है कारण
स्वयं हमें, ‘हम’ से
मिलाने  का....
वर्ना , 
कहाँ पहुँच पाते हैं
हमस्वयं के
अहसास तक ..................!!!!!


10 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसी अनुभूति सुधि में बसी रहे ... सुंदर अभिव्यक्ति

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  2. वो अहसास, जो
    बन जाता है कारण
    स्वयं हमें, ‘हम’ से
    मिलाने का....
    badhiyaa

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  3. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  4. स्वयं को स्वयं तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता है ... खुद को पा लिया तो इश्वर को पाना होता है ...
    गहरी अनुभूति है ...

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  5. कहाँ पहुँच पाते हैं
    हम, स्वयं के
    अहसास तक ..................!!!!!

    सुन्दर और शानदार लगी पोस्ट।

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  6. एहसासों की नदी अपनी
    एहसासों का सागर अपना
    मंथन का कंकड़ अपना ....
    हिलोरें इतनी तीव्रता से उठती हैं
    कि ....... नदी सागर से मिल नहीं पाती
    या मिलके भी अधूरी रह जाती है

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  7. गहन अनुभूति की सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  8. गहरी अनुभूति से उपजी एक भावपूर्ण रचना । बधाई आपको।

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