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शुक्रवार, 3 मई 2013

रंग ......................



बेशक रंग नही है मेरे हाथ में ....


कुछ स्वप्न तो है भर आँख के ....


जब जब हुई है यूँ ही सी बौछार ...


महके है फूल टेसू और पलाश के ................


रंग वही जो रंग दे मन ..........!!!!!!!!!!!!!



~~~~~~~~~~~~~~(१) ~~~~~~~~~~~~~~~~~

धुँधलाने लगे है रंग ...फिर भी 
चांदनी सा कोई रहता है संग...!!!

~~~~~~~~~~~~~~`२~~~~~~~~~~~



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