शनिवार, 27 अगस्त 2011

एहसास




हर बात से डर लगता है 
हर बात पे सहम जाते है 

जब झूठ के मेले में, एहसास 
बच्चे से कहीं खो जाते हैं .......

4 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है अंजू जी.
    कम शब्दों में गहरा अहसास करा दिया है आपने.
    झूँठ से बचकर इसे हर हाल में खोने से बचाना होगा.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  2. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना....एकदम मन को छूने वाली.

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  3. bahut sundar chhote shabdo me gahri baat.

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