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शनिवार, 9 नवंबर 2013

जब.… तब..... अब........! ?


जब चाहिए था 
स्नेह …

तब बोयी 
नफरत ,घृणा 
यूँ  आदी हो गई (जमीं )

अब बंजर जमीं से 
हरियाली पोशाक 
और 
गुलाबी खुशबू की 
उम्मीद क्यूँ  .......... ?!!


4 टिप्‍पणियां:

  1. उम्मीद कभी नहीं मरती ...एक पौध हमेशा बनी हुई है

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  2. वो घृणा उर में बोई ... उर ही में फंसे हैं कांटे अब ...
    पर पृथ्वी क्षमा शील है ,
    वो सिर्फ सुधार की प्रतीक्षा करती है ,
    माँ है न आखिर !!

    जवाब देंहटाएं
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    1. बहुत ही खूबसूरत भाव ..अनुज शुक्रिया आपका

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